बीघे भर का पलंग है लेकिन चादर औने पौने हैं
अलग-अलग पर यहां सभी के अपने-अपने रोने हैं
माना मेरी वाली तेरी वाली से कुछ सुंदर है
सच केवल मालूम उसे है नखरे जिसको धोने हैं
--कृपाल😎
बीघे भर का पलंग है लेकिन चादर औने पौने हैं
अलग-अलग पर यहां सभी के अपने-अपने रोने हैं
माना मेरी वाली तेरी वाली से कुछ सुंदर है
सच केवल मालूम उसे है नखरे जिसको धोने हैं
--कृपाल😎
दौड़ रहें हैं सुबह शाम पर,
जो कहते हैं सर तन से जुदा
वो आज से मेरे धन से जुदा
जो राम को मान नहीं देंगे
हम उनको काम नहीं देंगे
--कृपाल🙏
सहयोग जरूरी है संग्राम जरूरी है
जनता का सत्ता से संवाद जरूरी है
अपने अधिकारों के हो बोध सभी को पर
अपने दायित्वों की पहचान जरूरी है
है मात्र इकाई पर अरबों की शक्ति है
सब के हित में सबका मतदान जरूरी है
नज़र हटाना भी इनसे मुश्किल है इतनी प्यारी तुम्हारी आंखें
असर मिटाना भी जिसका मुश्किल है, अजब खुमारी तुम्हारी आंखें
हर एक घायल हर एक बेबस हर ओर आहों का शोर है बस
हर एक जिसका हुआ है कैदी, वो जेल प्यारी तुम्हारी आंखें
कुछ और काजल लगाकर इनको कुछ और कातिल बना दिया है
अचूक है इनका हर निशाना, गज़ब शिकारी तुम्हारी आंखें
खुदा की कुदरत या एक शरारत, बनाया इनको नशे की आदत
जहां में सुंदर है और भी पर, सभी पे भारी तुम्हारी आंखें
हर आंख महफिल में चोरी छुपकर, बस आंख इनसे मिला रही है,
हर आंख सपना यह देखती है, हो इनको प्यारी हमारी आंखें
--कृपाल😎
बढ़ के शादी से कोई घातक बीमारी भी नहीं,
सूचना जनहित में जिसपे कोई जारी भी नहीं,