Monday, 10 February 2020

नाम चेहरे कुछ पुराने, याद आते हैं बहुत,
आजभी किस्से पुराने, फिर हँसाते हैं बहुत,
बढते-बढते हम जो अब एक दूसरे से दूर हैं,
प्लान मिलने का हमेशा, हम बनाते हैंं बहुत।।

चाय सिगरेट इश्क फिल्में, की पढाई भी बहुत,
मार खाई साथ भी और, की पिटाई भी बहुत,
कोचिंगों के उन दिनों मे, साथ चलकर साथ मे,
साईकिलों पे जिंदगी, हमनें चलाई भी बहुत।।

#पुरानेदोस्त
-- कृपाल

Friday, 29 November 2019

इन आंखों के सब कायल हैं,
इन आंखों से सब घायल हैं,
और भी कर देता है पागल,
इन आंखों पे जब काजल है।।

--कृपाल😎
खून की इसके सजा, होती नहीं है, इसलिए,
अपने ही होते हैं खूनी, आपके विश्वास के ।
प्यार को अब दोस्ती से दूर रखते हैं सभी,
दोनों ही छलते कभी हैं, आपके विश्वास के ।

--कृपाल

Friday, 15 November 2019

अप्सरा

रूप की उसके कहां से, लेकर उपमा आऊं मैं,
उससा कुछ देखा नहीं तो, क्या उसे बतलाऊं मैं,
वो है शायद इस जमीं पर स्वर्ग की एक अप्सरा, स्वर्गवासी उसकी खातिर शौक से हो जाऊं मैं।।

Sunday, 8 September 2019

कुछ चोर मोर भोर शोर जोर लिख रहे हैं,
तुकबंदीयां मिलाकर हर ओर लिख रहे हैं।

कुछ शब्द आगे पीछे कुछ बात उल्टी-सीधी
हल्की सी बात को भी घनघोर लिख रहे हैं,
बस चोर मोर भोर शोर जोर लिख रहे हैं,
तुकबंदीयां मिलाकर हर ओर लिख रहे हैं।

शायर कवि सा कुछ अपने नाम में लगाकर,
गालिब या नाम दिनकर कमजोर लिख रहे हैं,
बस चोर मोर भोर शोर जोर लिख रहे हैं,
तुकबंदीयां मिलाकर हर ओर लिख रहे हैं,


हो गीत ग़ज़ल कविता या शायरी हो कोई,
लय भाव के अलावा कुछ और लिख रहे हैं ।।
बस चोर मोर भोर शोर जोर लिख रहे हैं,
तुकबंदीयां मिलाकर हर ओर लिख रहे हैं,

--कृपाल😎

Sunday, 25 August 2019

बा से बीवी, बा से बॉस,
इनसे कोई ना रखौ आस,
हमें चबाकर चट कर जाये,
जैसे बकरी खायें घास,
बा से बीवी, बा से बॉस,
इनसे कोई ना रखौ आस।

चाहे जितना करौ प्रयास,
नहीं कहेंगे ये शाबाश,
लाख कलेजा चिरौ तुम,
इनके लिये नहीं कुछ खास,
काम करावे रातौ दिन,
देते नहीं कभी अवकाश,
बा से बीवी, बा से बॉस,
इनसे कोई ना रखौ आस।

कभी है मिर्ची कभी मिठास,
मूड का नहीं करौ विसबास,
मुँह खोला तो होगा नाश,
चुपै सुनौ सभी बकवास,
भूल से कहीं किया जो लॉस,
इनके दिल मे रहेगी फांस,
बा से बीवी, बा से बॉस,
इनसे कोई ना रखौ आस।

दोनों में ये बात है खास,
टारगेट है इनकी सास,
गुस्सा भूख है इनके मन की,
और झूठी तारीफें प्यास,
प्रान बचाना चाहो काश,
बांध गठरिया चलौ कैलाश,
बा से बीवी, बा से बॉस,
इनसे कोई ना रखौ आस।।

--कृपाल

Saturday, 10 August 2019

हर बहादुर बेवकूफी करके यूं हारा गया,
खेल के धोखे में आके ज़ंग में मारा गया,
खा गया शादी का लड्डू जो नशे में जोश में,
उम्र फिर सारी बेचारा दस्त से मारा गया ।।

--कृपाल😎