Friday, 16 November 2018

ये दुनियाँ पागल खाना है...

दौड़ रहें हैं सुबह शाम पर,
कहीं नहीं आना जाना है,
कैसा बिन दीवारों वाला,
ये दुनियाँ पागल खाना है।।

अपने अपने नाम के पागल,
कुछ अल्लाह के राम के पागल,
थोड़े पागल काम काज में,
ज्यादातर हैं दाम के पागल,
नाम काम का दाम का चक्कर,
काट काटकर थक जाना हैं,
कैसा बिन दीवारों वाला,
ये दुनियाँ पागल खाना है।।

कोई दिल को हार के पागल,
कोई दिल को मार के पागल,
कोई उसकी नफरत मे खुश,
कोई उसके प्यार मे पागल,
प्यार का नफरत हार जीत का,
सबका अपना एक गाना हैं।
कैसा बिन दीवारों वाला,
ये दुनियाँ पागल खाना है।।

कोई सत्ता लोभ मे पागल,
कोई सत्ता क्षोभ मे पागल,
हर दल नेता और सरकारें,
राजनीति के रोग मे पागल,
कुर्सी चाह मे जीना इनका,
कुर्सी राह मे मर जाना हैं,
कैसा बिन दीवारों वाला,
ये दुनियाँ पागल खाना है।।

काम क्रोध मे लोभ मे पागल,
मद मे माया मोह मे पागल,
सबकुछ कोई खोकर भी खुश,
कोई सबकुछ जीत के पागल,
जिस मुठ्ठी मे बांध रहे सब,
उनको खाली रह जाना हैं,
कैसा बिन दीवारों वाला,
ये दुनियाँ पागल खाना है।।

मेरी शायरी में मिसालों की बातें...

ख्यालों से गहरी ख्यालों की बातें,
सवालों से भारी सवालों की बातें,
तुम्ही से शुरू हैं तुम्ही पे खत्म हैं,
मेरी शायरी में मिसालों की बातें।।

हूँ मीलों की सालों की दूरी पे जिनसें,
मै हररोज मिलता हूँ सपनों मे उनसें,
वो हर याद की आग फिर से जलाके,
वो कहते हैं फिरसे जलालो ये रातें।।

न कुछ बाअद तेरे न कुछ तेरे पहले,
मेरा दिल उन्हीं चार गलियों मे टहले,
हमें इन से बाहर का रस्ता दिखाओ,
कोई दिल से मेरे निकालों ये बातें।।

Saturday, 27 October 2018

आया चुनाव सबकी बड़ी तेज तैयारी हैं...

आया चुनाव सबकी बड़ी तेज तैयारी हैं,
है रोड शो कहीं तो कहीं रैलियां भारी हैं,
सबको ही दिखानी है बड़ी भीड़ है पीछे,
चिडियों को किराए पे जमा करते शिकारी हैं।

हर कोई दूसरे को बड़ा चोर बोलता है,
पर अपनी चोरियों पे कोई मुंह न खोलता है,
कीचड़ की वाँलीवाल यहां खेलते सभी,
कीचड़ उछालने की प्रतियोगिता जारी है।

वादों की लाँलीपाँप पुरानी चटा रहे हैं,
अबकी करेंगे काम कसम फिर से खा रहे हैं,
वैसे तो  झूठ आप कभी बोलते नहीं,
वादों को भूलने की मगर खास बिमारी है।

जनता के समर्थन से ये जनता को लूटते हैं
हमको समझ के नींबू हमसे रस निचोड़ते हैं
जो हमको दिखाते हैं पांच साल बराबर,
ठेंगा वहीं इन्हीं को दिखाने की ये बारी हैं।

Kavi ya Halwai

शब्द का मैदा तेल की स्याही,
कागज जैसे गरम कढाई,
चीनी भावों भरी जलेबी,
कविता बना रहा हलवाई(FB)

Sunday, 7 October 2018

हमरे गांव के पप्पू भइया...


हमरे गांव के पप्पू भइया,
परधानी को खडे हो गये,
युवा है वो अडतालीस के पर,
लगता नहीं कि बडे हो गये।।
हमरे गांव के पप्पू भइया,
परधानी को खडे हो गये,

हैं युवराज इलाके के ये,
राज पुराना साल था सत्तर,
जबसे नया प्रधान ये आया,
कर दी इनकी छीछालेदर,
पंचायत के थे फूल गुलाबी,
आम ये सबसे सडे हो गये ।।
हमरे गांव के पप्पू भइया,
परधानी को खडे हो गये,

लिखा हुआ भाषण ये पढ़ते,
सुनकर जिसको सारे हँसते,
गाड़ी इनकी राजा बाबू,
कुर्ता लेकिन फटा पहनते,
स्वांग कला मे कुछ सालों से,
महारथी ये बडे हो गये ।।
हमरे गांव के पप्पू भइया,
परधानी को खडे हो गये,

खुद कुनबा इतिहास घोटाला,
पर प्रधान को चोर बताते,
जोड़ तोड़ के घुमा के बातें
जनता को झुठा भडकाते,
आया पास चुनाव तो भइया,
शिव के भक्त ये बडे हो गये ।।
हमरे गांव के पप्पू भइया,
परधानी को खडे हो गये,

बड़ी लडाई लडने को ये,
कमर कलेजा ठान चुके हैं,
अभी तलक की सारी जंगे,
बुरी तरह से हार चुके है,
फूट रहे है एक एक कर,
भरे हुए जो घड़े हो गए ।।
हमरे गांव के पप्पू भइया,
परधानी को खडे हो गये,


बना रहे है सबको साथी,
लालटेन और साइकिल हाथी,
ममता दीदी भी चिल्लायें,
आओ मिलकर साथ हरायें,
एक शेर से लडने को फिर,
सारे गीदड़ जुड़े हो गये ।।
हमरे गांव के पप्पू भइया,
परधानी को खडे हो गये

Friday, 5 October 2018

Halka Fulka...

हर तरह के रोग का उपचार होना चाहिए,
दर्द से हर मुक्त ये संसार होना चाहिए,
इश्क मे गालिब कोई फिर से निक्कमा न बने,
प्यार के टीके का अविष्कार होना चाहिए,(FB)


बहुत अनजान हूँ, मैं शायरी गीतों से गजलों से,
ये दिल का हाल है, जो गा के तुमसे कह रहा हूँ मै,
देना दाद तुम चाहेबडी कोई शायरी जैसे,
मगर जो दिल को छू जाए, तो थोड़ा मुस्कुरा देना।।(FB)



यूँ तो कहने को कई साल, बडा हो चुका हूँ मै
मगर वो उम्र सत्रहवीं जो कभी छूटती नहीं,
तूझें जो कह पाये उस बरस कई कोशिशों मे भी
उसी कोशिश की फिर खवाहिश मुक्कमल टूटती नही(FB)



रही कई रात आँखों में, मेरे मीठी सी बैचेनी
मेरी आँखों मे आँखें डाल कर, कुछ कह गये जो तुम
रहा एहसास चीनी सा, कई दिन होंठ पे मेरे,
मेरे होंठों को होंठों से, जो थोडा छू गए थे तुम।।(FB)



शराबों का तेरी यादों से, झगड़ा है बहुत गहरा,
एक चढती नहीं, एक उतरती नहीं।।(FB)



नशा भरपूर करने की, तलब मे की है तैयारी,
तेरी यादों की पोथी खोल के मैं साथ बैठा हूँ,
रहेगा होश कायम, सुबह तक जानते हैं हम
तेरी यादों के बीचोबीच, सारी रात बैठा हूँ ।।(FB)




अपनी किस्मत पे इतरा, जिंदा बकरे,
छुरी तेरे लिए भी तेज, कहीं हो रही होगी
हुनर बेकार सब होगें, हुनर के सामने उसके,
तुझे तेरी ही ताकत से, वो "बाली" है हरायेगी,(FB)



बेजान से हो जाते थे, जिसे देखकर ही हम,
मेरी पहली जान, बहुत जानदार थी ।।(FB)



बहुत आते थे मेरे घर, मोहल्ले के सभी घायल,
मेरे दोनो पडोसो़ मे, कुछ ऐसे लोग रहते थे ।।



आधी वाली विदा हुयी, थाम के जब पूरे का हाथ,
खुलकर जीजा रो पाये, जीजी खडी हुयी थी साथ।।(FB)


मुझको उसके प्यार का चक्कर, चक्कर पे चक्कर कटवाये,
तबके गिरे उठे अबतक, मुझसे वो ऐसे टकराये,



गुजरे जो एक बार फिर, मेरी गली से वो,
सालों का वक्त, चंद पलों मे गुजर गया
पहचान भी लिया , और हंसे भी जरा सा वो,
सालों का वक्त, मेरी उमर से निकल गया ।।


ये मेरा अक्स छोटा सा, छुपा है चोर ये रुस्तम,
हंसी से खेल से अपने, चुरा लेता है सारे गम।।(FB)