महल किसी के सड़क किसी के हिस्से हैं,
किसी की नींदें किसी की चादर बाकी है,
कौन यहां पर सब कुछ लेकर आया है,
कुछ तेरा कुछ मेरा ऊपर बाकी है।
--कृपाल
महल किसी के सड़क किसी के हिस्से हैं,
किसी की नींदें किसी की चादर बाकी है,
कौन यहां पर सब कुछ लेकर आया है,
कुछ तेरा कुछ मेरा ऊपर बाकी है।
--कृपाल
पूछ खुद से यही रहा हूं मै,
जिंदगी किसकी जी रहा हूं मै,
प्यास कुछ और थी मुझे कल तक,
आज कुछ और पी रहा हूं मै ।
😎कृपाल
हर एक जिंदगी में छाले हैं,
कुछ खुदाई, कुछ खुद के पाले हैं,
हंस के देखो तो है दिवाली भी,
रोना चाहो तो बस दिवाले हैं।
--कृपाल 😎
मैं सभी उसके इशारे जानता हूँ ,
हर अदा उसकी बहुत पहचानता हूँ ,
यूं तो कह देती है अक्सर खुलके मुझसे,
बिन कहे भी पांव उसके दाबता हूँ।
-कृपाल 😁
बीघे भर का पलंग है लेकिन चादर औने पौने हैं
अलग-अलग पर यहां सभी के अपने-अपने रोने हैं
माना मेरी वाली तेरी वाली से कुछ सुंदर है
सच केवल मालूम उसे है नखरे जिसको धोने हैं
--कृपाल😎
दौड़ रहें हैं सुबह शाम पर,
जो कहते हैं सर तन से जुदा
वो आज से मेरे धन से जुदा
जो राम को मान नहीं देंगे
हम उनको काम नहीं देंगे
--कृपाल🙏