शब्द सबकुछ तो कह नहीं सकते
खोल हर दिल की तह नहीं सकते
भावनाओं के ज्वार भाटों में
संतुलन में तो रह नहीं सकते
साथ कुछ दिन या कुछ जनम का हो
दूर कुछ पल भी रह नहीं सकते
कल जो होगा देखा जायेगा
कल की हम आज कह नहीं सकते
शब्द सबकुछ तो कह नहीं सकते
खोल हर दिल की तह नहीं सकते
भावनाओं के ज्वार भाटों में
संतुलन में तो रह नहीं सकते
साथ कुछ दिन या कुछ जनम का हो
दूर कुछ पल भी रह नहीं सकते
कल जो होगा देखा जायेगा
कल की हम आज कह नहीं सकते
जिंदगी कितनी कठिन है, जिंदगी कितनी सरल है
गौर से देखो तो मुश्किल, गौर से देखो तो हल है
इस नकली झूठी दुनिया में हम भी नकलीपन घोलेंगे
सोच लिया है हमने भी हम ब्यूटी पार्लर खोलेंगे
आज पड़ोसी कुत्ते ने फिर छुपकर हमको काटा है,
पुलवामा की सडक को उसने मेरे खून से पाटा है,
आंसू दिल मे खौल रहे हैं, आग लगी है आंखों मे,
प्रेमदिवस पर लाशों को उपहार बनाकर बांटा है।।
मरने वालों की संख्या, क्या पूरी भी हो सकती है,
दूर गिरी है घर पर जो, उन लाशों की क्या गिनती है।
आने वाली होली मे, उस घर का मंजर क्या होगा,
बाप भाई या बेटा जब, तश्वीरों मे लटका होगा,
खादी वाले गधे एक दो, आज भी खुलके रेंक रहे,
कईं चित्ताऔ की गर्मी मे, राजनीति वो सेंक रहे,
जिनको नहीं दिखाई देते, शव जो केवल टुकड़े हैं,
वो दिल के ऐसे नंगे है, खाल पे जिनके कपडें है।।
बदला चीख रही है क्रोधित आज आत्मा भारत की,
घर मे घुसकर हमलें को पहचान बना दो भारत की,
निंदा वाली तोप नहीं और न गांधी की बोली हो,
कुछ घंटों बस सेना के आजाद हाथ मे गोली हो,
मरने वाले सैनिक को, सम्मान दिला दो मोदी जी,
छप्पन वाली छाती फिर, एकबार दिखा दो मोदी जी।।
--कृपाल
चादर को अपनी देखकर ही पांव फैलाओ,
लालच बुरी बला है ये दिमाग मे लाओ,
जो आपके बजट मे बराबर से फिक्स हो,
कम मैन्टिनैंश वाली गर्ल फ्रैंड बनाओ।
--कृपाल
हाँ मैं यह मानता हूँ तुझसे शादी की तमन्ना थी,
ना पालो भ्रम कि तेरा हुस्न पाने की तमन्ना थी,
वो इतना प्यार देती थी मैं जब भी घर तेरे आया,
तेरी अम्मा को केवल सास कहने की तमन्ना थी।
--कृपाल
प्यार का चेहरा कभी वो, है कभी गुस्से की सूरत
मोम सी कोमल भी है और, है कभी पत्थर की मूरत
देव भी अनभिज्ञ हैं, उसकी दशाएं और कला से
खूबसूरत भी बला की, और बला भी खूबसूरत ।
--कृपाल😎