जिन बातों पर लड़ते थे हम,
उन बातों पर हंसते हैं हम,
जाने कब सीखेंगे हम ये,
किन बातों पे लड़ते हैं हम।
--कृपाल😎
कुछ तुम भी खुशनसीब थे कुछ हम भी खुशनसीब
तुम और के करीब थे हम और के करीब
पछता रहे हैं तुम को गले से लगा के हम
मौसम बहुत अजीब है तेरे बहुत करीब
हैं आजकल चुनाव की तैयारियों में ये,
वरना बहुत अमीर हैं ये आम से गरीब
हालात उनके देखकर दिल को सुकू मिला
इतरा रहे थे जो कभी बनकर मेरे रकीब
दौलत अलग-अलग कमाते हैं सब यहां
कोई कहीं गरीब है कोई कहीं गरीब
--kripal
कल कुछ करने की चाहत में कल तक कुछ ना कर पाएगा,
कल से कल की दौड़ में फंसकर आज बेचारा मर जाएगा
रोज थोड़ी खर्च कर थोड़ी बचा लेते है सब,
जिंदगी एक और दिन ऐसे चला लेते है सब..
एकदिन लूट जाएगी सारी बचत एक साथ में,
फिर भी जाने क्यों बचाने में गँवा देते है सब...
--कृपाल
सोच रहा हूँ चलते चलते दूर सफर पर जाऊँ मैं,
जीने में कुछ जान नहीं तो क्यों ना अब मर जाऊँ मैं,
दोस्त दुश्मनों संबंधों में फर्क नहीं कुछ लगता है,
जी करता है सबसे झूठी तारीफें करवाऊँ मैं,
दौलत शोहरत चाहत इज्जत बहुत कमाई कर ली है,
लुट जाने से पहले क्यों ना हाथों से लुटवाऊँ मैं,
यूं तो सुनता रहा सुनाता गीत ग़ज़ल हर महफिल मे,
एक शाम अब याद में अपनी दुनिया को सुनवाऊँ मैं,
--कृपाल