Friday, 13 December 2024

चलते रहने का नाम जीवन है

 

जीत या हार कुछ नहीं होती

लड़ते रहने का नाम जीवन है

मंजिले तो बस एक बहाना है

चलते रहने का नाम जीवन है


यह सजा भी है यह मजा भी है

चुनते रहने का नाम जीवन है

मिल के हरेक दिल से महफ़िल में

मिलते रहने का नाम जीवन है


पार की चाह धार में रहकर

बहते रहने का नाम जीवन है

दोस्ती दुश्मनी के सांचों में 

ढलते रहने का नाम जीवन है

Wednesday, 11 December 2024

धोखा

 तेरे धोखे की शक्ल में जो मिली, तमाम उम्र की सजा है मेरी,

मेरे मरने की खबर हो तुझे मुझसे पहले, बस तुझे इतनी बद्दुआ है मेरी

जहर अब दवा है, दवा अब जहर है

 यूँ धोखे का मुझपर हुआ कुछ असर है

जहर अब दवा है, दवा अब जहर है

मुझे जिसने मारा, उसी ने बचाया, 

ये अहसान उसका या उसका कहर है

दूर कुछ पल भी रह नहीं सकते


शब्द सबकुछ तो कह नहीं सकते

खोल हर दिल की तह नहीं सकते

भावनाओं के ज्वार भाटों में

संतुलन में तो रह नहीं सकते


साथ कुछ दिन या कुछ जनम का हो

दूर कुछ पल भी रह नहीं सकते

कल जो होगा देखा जायेगा

कल की हम आज कह नहीं सकते

Tuesday, 27 February 2024

जिंदगी


जिंदगी कितनी कठिन है, जिंदगी कितनी सरल है

गौर से देखो तो मुश्किल, गौर से देखो तो हल है


हारने की जिंदगी मे जीत सी ही भूमिका है
हार हो या जीत हो बस, जिंदगी का एक पल है

रोज लड़कर रोज थकना, रोज थककर रोज लड़ना
लड़ते लड़ते जो मिला वो, जिंदगी का भागफल है

मोड़ पर एक खत्म होकर, दूसरे पर फिर शुरू हो
आज चाहे खत्म हो पर, कल नया एक और कल है

मंजिले हो एक चाहे, मंजिले चाहे अलग हो,
रास्तों मे हमसफ़र का साथ होना एक बल है

 कृपाल😎

Wednesday, 5 April 2023

ब्यूटी-पार्लर

इस नकली झूठी दुनिया में हम भी नकलीपन घोलेंगे

सोच लिया है हमने भी हम ब्यूटी पार्लर खोलेंगे


ब्लीच वैक्स थ्रेडिंग से सारी खरपतवार निकालेंगे
पैडी मैनीक्योर से सूखी पपड़ी सभी उतारेंगे
प्राइमर पुट्टी पोत पोत कर सभी दरारें भर देंगे
पेंट वार्निश चिकनाई से सब कुछ चिकना कर देंगे
सजा सजा कर ऐसा कर देंगे कोई ना जानेगा
खंडहर को भी धोखे में सब ताजमहल ही बोलेंगे
सोच लिया है हमने भी हम ब्यूटी पार्लर खोलेंगे

कृपाल 😎

Tuesday, 14 February 2023

Pulwama Ka Dard

 आज पड़ोसी कुत्ते ने फिर छुपकर हमको काटा है,

पुलवामा की सडक को उसने मेरे खून से पाटा है,

आंसू दिल मे खौल रहे हैं, आग लगी है आंखों मे,

प्रेमदिवस पर लाशों को उपहार बनाकर बांटा है।।


मरने वालों की संख्या, क्या पूरी भी हो सकती है,

दूर गिरी है घर पर जो, उन लाशों की क्या गिनती है।

आने वाली होली मे, उस घर का मंजर क्या होगा,

बाप भाई या बेटा जब, तश्वीरों मे लटका होगा,


खादी वाले गधे एक दो, आज भी खुलके रेंक रहे,

कईं चित्ताऔ की गर्मी मे, राजनीति वो सेंक रहे,

जिनको नहीं दिखाई देते, शव जो केवल टुकड़े हैं,

वो दिल के ऐसे नंगे है, खाल पे जिनके कपडें है।।


बदला चीख रही है क्रोधित आज आत्मा भारत की,

घर मे घुसकर हमलें को पहचान बना दो भारत की,

निंदा वाली तोप नहीं और न गांधी की बोली हो,

कुछ घंटों बस सेना के आजाद हाथ मे गोली हो,


मरने वाले सैनिक को, सम्मान दिला दो मोदी जी,

छप्पन वाली छाती फिर, एकबार दिखा दो मोदी जी।।


--कृपाल