Saturday, 12 July 2025

तुम्हारी आंखे

 नज़र हटाना भी इनसे मुश्किल है इतनी प्यारी तुम्हारी आंखें

असर मिटाना भी जिसका मुश्किल, अजब खुमारी तुम्हारी आंखें 


तुम्हारी आंखे


हर एक घायल हर एक बेबस हर ओर आहों का शोर है बस

हर एक जिसका हुआ है कैदी, वो जेल प्यारी तुम्हारी आंखें 


कुछ और काजल लगाकर इनको कुछ और कातिल बना दिया है

अचूक है इनका हर निशाना, गज़ब शिकारी तुम्हारी आंखें 


खुदा की कुदरत या एक शरारत, बनाया इनको नशे की आदत

जहां में सुंदर है और भी पर, सभी पे भारी तुम्हारी आंखें 


हर आंख महफिल में चोरी छुपकर, बस आंख इनसे मिला रही है,

हर आंख सपना यह देखती है, हो इनको प्यारी हमारी आंखें


--कृपाल😎

Friday, 13 December 2024

चलते रहने का नाम जीवन है

 

जीत या हार कुछ नहीं होती

लड़ते रहने का नाम जीवन है

मंजिले तो बस एक बहाना है

चलते रहने का नाम जीवन है


यह सजा भी है यह मजा भी है

चुनते रहने का नाम जीवन है

मिल के हरेक दिल से महफ़िल में

मिलते रहने का नाम जीवन है


पार की चाह धार में रहकर

बहते रहने का नाम जीवन है

दोस्ती दुश्मनी के सांचों में 

ढलते रहने का नाम जीवन है

Wednesday, 11 December 2024

धोखा

 तेरे धोखे की शक्ल में जो मिली, तमाम उम्र की सजा है मेरी,

मेरे मरने की खबर हो तुझे मुझसे पहले, बस तुझे इतनी बद्दुआ है मेरी

जहर अब दवा है, दवा अब जहर है

 यूँ धोखे का मुझपर हुआ कुछ असर है

जहर अब दवा है, दवा अब जहर है

मुझे जिसने मारा, उसी ने बचाया, 

ये अहसान उसका या उसका कहर है

दूर कुछ पल भी रह नहीं सकते


शब्द सबकुछ तो कह नहीं सकते

खोल हर दिल की तह नहीं सकते

भावनाओं के ज्वार भाटों में

संतुलन में तो रह नहीं सकते


साथ कुछ दिन या कुछ जनम का हो

दूर कुछ पल भी रह नहीं सकते

कल जो होगा देखा जायेगा

कल की हम आज कह नहीं सकते

Tuesday, 27 February 2024

जिंदगी


जिंदगी कितनी कठिन है, जिंदगी कितनी सरल है

गौर से देखो तो मुश्किल, गौर से देखो तो हल है


हारने की जिंदगी मे जीत सी ही भूमिका है
हार हो या जीत हो बस, जिंदगी का एक पल है

रोज लड़कर रोज थकना, रोज थककर रोज लड़ना
लड़ते लड़ते जो मिला वो, जिंदगी का भागफल है

मोड़ पर एक खत्म होकर, दूसरे पर फिर शुरू हो
आज चाहे खत्म हो पर, कल नया एक और कल है

मंजिले हो एक चाहे, मंजिले चाहे अलग हो,
रास्तों मे हमसफ़र का साथ होना एक बल है

 कृपाल😎

Wednesday, 5 April 2023

ब्यूटी-पार्लर

इस नकली झूठी दुनिया में हम भी नकलीपन घोलेंगे

सोच लिया है हमने भी हम ब्यूटी पार्लर खोलेंगे


ब्लीच वैक्स थ्रेडिंग से सारी खरपतवार निकालेंगे
पैडी मैनीक्योर से सूखी पपड़ी सभी उतारेंगे
प्राइमर पुट्टी पोत पोत कर सभी दरारें भर देंगे
पेंट वार्निश चिकनाई से सब कुछ चिकना कर देंगे
सजा सजा कर ऐसा कर देंगे कोई ना जानेगा
खंडहर को भी धोखे में सब ताजमहल ही बोलेंगे
सोच लिया है हमने भी हम ब्यूटी पार्लर खोलेंगे

कृपाल 😎

Tuesday, 14 February 2023

Pulwama Ka Dard

 आज पड़ोसी कुत्ते ने फिर छुपकर हमको काटा है,

पुलवामा की सडक को उसने मेरे खून से पाटा है,

आंसू दिल मे खौल रहे हैं, आग लगी है आंखों मे,

प्रेमदिवस पर लाशों को उपहार बनाकर बांटा है।।


मरने वालों की संख्या, क्या पूरी भी हो सकती है,

दूर गिरी है घर पर जो, उन लाशों की क्या गिनती है।

आने वाली होली मे, उस घर का मंजर क्या होगा,

बाप भाई या बेटा जब, तश्वीरों मे लटका होगा,


खादी वाले गधे एक दो, आज भी खुलके रेंक रहे,

कईं चित्ताऔ की गर्मी मे, राजनीति वो सेंक रहे,

जिनको नहीं दिखाई देते, शव जो केवल टुकड़े हैं,

वो दिल के ऐसे नंगे है, खाल पे जिनके कपडें है।।


बदला चीख रही है क्रोधित आज आत्मा भारत की,

घर मे घुसकर हमलें को पहचान बना दो भारत की,

निंदा वाली तोप नहीं और न गांधी की बोली हो,

कुछ घंटों बस सेना के आजाद हाथ मे गोली हो,


मरने वाले सैनिक को, सम्मान दिला दो मोदी जी,

छप्पन वाली छाती फिर, एकबार दिखा दो मोदी जी।।


--कृपाल

Thursday, 20 October 2022

गर्ल फ्रैंड

चादर को अपनी देखकर ही पांव फैलाओ,

लालच बुरी बला है ये दिमाग मे लाओ,

जो आपके बजट मे बराबर से फिक्स हो,

कम मैन्टिनैंश वाली गर्ल फ्रैंड बनाओ।


--कृपाल

तमन्ना

 हाँ मैं यह मानता हूँ तुझसे शादी की तमन्ना थी,

ना पालो भ्रम कि तेरा हुस्न पाने की तमन्ना थी,

वो इतना प्यार देती थी मैं जब भी घर तेरे आया,

तेरी अम्मा को केवल सास कहने की तमन्ना थी।


--कृपाल

खूबसूरत

प्यार का चेहरा कभी वो, है कभी गुस्से की सूरत

मोम सी कोमल भी है और, है कभी पत्थर की मूरत

देव भी अनभिज्ञ हैं, उसकी दशाएं और कला से

खूबसूरत भी बला की, और बला भी खूबसूरत ।


--कृपाल😎

कुछ तेरा कुछ मेरा ऊपर बाकी है

महल किसी के सड़क किसी के हिस्से हैं,

किसी की नींदें किसी की चादर बाकी है,

कौन यहां पर सब कुछ लेकर आया है,

कुछ तेरा कुछ मेरा ऊपर बाकी है।


--कृपाल

पूछ खुद से यही रहा हूं मै

 पूछ खुद से यही रहा हूं मै,

जिंदगी किसकी जी रहा हूं मै,

प्यास कुछ और थी मुझे कल तक,

आज कुछ और पी रहा हूं मै ।


😎कृपाल

हर एक जिंदगी में छाले हैं

 हर एक जिंदगी में छाले हैं,

कुछ खुदाई, कुछ खुद के पाले हैं,

हंस के देखो तो है दिवाली भी, 

रोना चाहो तो बस दिवाले हैं। 


--कृपाल 😎

मैं सभी उसके इशारे जानता हूँ ,

 मैं सभी उसके इशारे जानता हूँ ,

हर अदा उसकी बहुत पहचानता हूँ ,

यूं तो कह देती है अक्सर खुलके मुझसे,

बिन कहे भी पांव उसके दाबता हूँ। 


-कृपाल 😁

अपने अपने रोने है

 बीघे भर का पलंग है लेकिन चादर औने पौने हैं

अलग-अलग पर यहां सभी के अपने-अपने रोने हैं

माना मेरी वाली तेरी वाली से कुछ सुंदर है

सच केवल मालूम उसे है नखरे जिसको धोने हैं 


--कृपाल😎

Friday, 22 July 2022

ये दुनियाँ पागल खाना है

 दौड़ रहें हैं सुबह शाम पर,

कहीं नहीं आना जाना है,
कैसा बिन दीवारों वाला,
ये दुनियाँ पागल खाना है।।
अपने अपने नाम के पागल,
कुछ अल्लाह के राम के पागल,
थोड़े पागल काम काज में,
ज्यादातर हैं दाम के पागल,
नाम काम का दाम का चक्कर,
काट काटकर थक जाना हैं,
कैसा बिन दीवारों वाला,
ये दुनियाँ पागल खाना है।।
कोई दिल को हार के पागल,
कोई दिल को मार के पागल,
कोई उसकी नफरत मे खुश,
कोई उसके प्यार मे पागल,
प्यार का नफरत हार जीत का,
सबका अपना एक गाना हैं।
कैसा बिन दीवारों वाला,
ये दुनियाँ पागल खाना है।।
कोई सत्ता लोभ मे पागल,
कोई सत्ता क्षोभ मे पागल,
हर दल नेता और सरकारें,
राजनीति के रोग मे पागल,
कुर्सी चाह मे जीना इनका,
कुर्सी राह मे मर जाना हैं,
कैसा बिन दीवारों वाला,
ये दुनियाँ पागल खाना है।।
काम क्रोध मे लोभ मे पागल,
मद मे माया मोह मे पागल,
सबकुछ कोई खोकर भी खुश,
सबकुछ कोई जीत के पागल,
जिस मुठ्ठी मे बांध रहे सब,
उनको खाली रह जाना हैं,
कैसा बिन दीवारों वाला,
ये दुनियाँ पागल खाना है।।

Thursday, 7 July 2022

हम उनको काम नहीं देंगे

जो कहते हैं सर तन से जुदा
वो आज से मेरे धन से जुदा
जो राम को मान नहीं देंगे
हम उनको काम नहीं देंगे

--कृपाल🙏

Friday, 8 April 2022

मतदान जरूरी है


सहयोग जरूरी है संग्राम जरूरी है

जनता का सत्ता से संवाद जरूरी है

अपने अधिकारों के हो बोध सभी को पर

अपने दायित्वों की पहचान जरूरी है 

है मात्र इकाई पर अरबों की शक्ति है

सब के हित में सबका मतदान जरूरी है

Wednesday, 10 November 2021

तुम्हारी आंखे

 नज़र हटाना भी इनसे मुश्किल है इतनी प्यारी तुम्हारी आंखें

असर मिटाना भी जिसका मुश्किल है, अजब खुमारी तुम्हारी आंखें 


हर एक घायल हर एक बेबस हर ओर आहों का शोर है बस

हर एक जिसका हुआ है कैदी, वो जेल प्यारी तुम्हारी आंखें 


कुछ और काजल लगाकर इनको कुछ और कातिल बना दिया है

अचूक है इनका हर निशाना, गज़ब शिकारी तुम्हारी आंखें 


खुदा की कुदरत या एक शरारत, बनाया इनको नशे की आदत

जहां में सुंदर है और भी पर, सभी पे भारी तुम्हारी आंखें 


हर आंख महफिल में चोरी छुपकर, बस आंख इनसे मिला रही है,

हर आंख सपना यह देखती है, हो इनको प्यारी हमारी आंखें


--कृपाल😎